
नई दिल्ली में 8 दिसंबर को, चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने घोषणा की कि दूतावास 22 दिसंबर 2025 से वीजा आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन कर देगा। आवेदक अब VisaForChina के पोर्टल पर फॉर्म भरेंगे, दस्तावेज़ अपलोड करेंगे और अपॉइंटमेंट बुक करेंगे, जिससे कागजी प्रक्रिया पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
यह कदम भारत के हालिया फैसले के अनुरूप है, जिसमें 2020 की सीमा विवाद के बाद पांच साल के ठहराव के बाद चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से शुरू किए गए हैं। व्यापार वीजा पहले ही 2025 में बहाल हो चुके थे; टूरिस्ट वीजा 26 नवंबर से लागू हुए। दोनों देशों के बीच सीधे वाणिज्यिक उड़ानें अक्टूबर में फिर से शुरू हुईं और विश्वास बढ़ाने वाली बातचीत के तहत कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा मार्ग भी पुनर्जीवित हुआ, जो संबंधों में धीरे-धीरे सुधार का संकेत है।
भारतीय कंपनियों और ट्रैवल मैनेजरों के लिए यह डिजिटल प्रक्रिया आवेदन समय और कूरियर खर्च कम करेगी, साथ ही दस्तावेज़ों की ट्रैकिंग भी आसान बनाएगी। दूतावास ने बताया कि बायोमेट्रिक संग्रह वीजा आवेदन केंद्र पर ही होगा, लेकिन बैक-ऑफिस जांच डिजिटल होने के बाद अपॉइंटमेंट स्लॉट्स बढ़ जाएंगे।
व्यावहारिक तौर पर, कंपनियों को यात्रियों को पोर्टल पर अकाउंट बनाने और पासपोर्ट व समर्थन पत्रों को PDF में प्री-स्कैन करने के लिए निर्देश देना चाहिए। एचआर टीमों को भी डेटा-प्राइवेसी प्रोटोकॉल की समीक्षा करनी होगी क्योंकि दस्तावेज़ चीनी सर्वरों से गुजरेंगे।
विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम बीजिंग का अन्य बड़े स्रोत बाजारों में पूरी तरह ऑनलाइन वीजा आवेदन प्रणाली लागू करने का परीक्षण है; जकार्ता और मनीला में मिशन अगली कतार में हैं।
यह कदम भारत के हालिया फैसले के अनुरूप है, जिसमें 2020 की सीमा विवाद के बाद पांच साल के ठहराव के बाद चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से शुरू किए गए हैं। व्यापार वीजा पहले ही 2025 में बहाल हो चुके थे; टूरिस्ट वीजा 26 नवंबर से लागू हुए। दोनों देशों के बीच सीधे वाणिज्यिक उड़ानें अक्टूबर में फिर से शुरू हुईं और विश्वास बढ़ाने वाली बातचीत के तहत कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा मार्ग भी पुनर्जीवित हुआ, जो संबंधों में धीरे-धीरे सुधार का संकेत है।
भारतीय कंपनियों और ट्रैवल मैनेजरों के लिए यह डिजिटल प्रक्रिया आवेदन समय और कूरियर खर्च कम करेगी, साथ ही दस्तावेज़ों की ट्रैकिंग भी आसान बनाएगी। दूतावास ने बताया कि बायोमेट्रिक संग्रह वीजा आवेदन केंद्र पर ही होगा, लेकिन बैक-ऑफिस जांच डिजिटल होने के बाद अपॉइंटमेंट स्लॉट्स बढ़ जाएंगे।
व्यावहारिक तौर पर, कंपनियों को यात्रियों को पोर्टल पर अकाउंट बनाने और पासपोर्ट व समर्थन पत्रों को PDF में प्री-स्कैन करने के लिए निर्देश देना चाहिए। एचआर टीमों को भी डेटा-प्राइवेसी प्रोटोकॉल की समीक्षा करनी होगी क्योंकि दस्तावेज़ चीनी सर्वरों से गुजरेंगे।
विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम बीजिंग का अन्य बड़े स्रोत बाजारों में पूरी तरह ऑनलाइन वीजा आवेदन प्रणाली लागू करने का परीक्षण है; जकार्ता और मनीला में मिशन अगली कतार में हैं।
स्रोत: ET Travel World
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