
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की 17 नवंबर की ताजा रिपोर्ट में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में वीजा इंतजार के समय में भारी अंतर दिखा है। मुंबई में बी1/बी2 विज़िटर वीज़ा इंटरव्यू के लिए औसतन 9.5 महीने का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि दिल्ली में अगली उपलब्ध तारीख 10 महीने बाद है, हालांकि वहां औसत इंतजार समय 3.5 महीने बताया गया है। इसके विपरीत, चेन्नई में केवल तीन महीने बाद और हैदराबाद में पांच महीने बाद ही इंटरव्यू के लिए स्लॉट खुलते हैं।
यह आंकड़े भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनके अधिकारी अमेरिका में बिक्री मीटिंग, ट्रेड शो और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट के लिए जाते हैं। मुंबई की एक कंपनी जो मार्च 2026 में लास वेगास में होने वाले एक एक्सपो में स्टाफ भेजना चाहती है, उसे स्थानीय कांसुलेट पर निर्भर रहने पर देरी का सामना करना पड़ेगा। इसलिए, कंपनियों के मोबिलिटी मैनेजर चेन्नई या हैदराबाद में अपॉइंटमेंट बुक कर घरेलू यात्रा खर्च उठाते हुए ‘वीजा-शॉपिंग’ कर रहे हैं।
कांसुलेट अधिकारियों के अनुसार, मुंबई में वीजा बैकलॉग का कारण महामारी के दौरान स्टाफ की कमी और क्रूज यात्रियों तथा शादी समारोह के यात्रियों की बढ़ी हुई मांग है। वे आवेदकों से अनुरोध करते हैं कि वे कैंसलेशन के लिए पोर्टल पर नजर रखें, जिससे जल्दी स्लॉट मिल सकते हैं। साथ ही, दूतावास ने शनिवार को इंटरव्यू शिफ्ट फिर से शुरू कर दी है और छोटे पोस्टों से अधिकारियों को मुंबई में तैनात कर रहा है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक असली राहत मध्य 2026 तक नहीं मिल पाएगी।
कंपनियां अब प्रोजेक्ट योजनाओं में अधिक समय शामिल कर रही हैं और महत्वपूर्ण कर्मचारियों को कम व्यस्त समय में पांच या दस साल के मल्टीपल-एंट्री वीजा लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। इमिग्रेशन वकील भी यात्रियों को याद दिलाते हैं कि अगर वे कांसुलेट बदलते हैं तो नया DS-160 फॉर्म और MRV फीस देनी होगी, और पूर्व वीजा धारकों के लिए फिंगरप्रिंट पुन: उपयोग (“ड्रॉप-बॉक्स”) विकल्प से इंतजार का समय आधा हो सकता है।
यह आंकड़े भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनके अधिकारी अमेरिका में बिक्री मीटिंग, ट्रेड शो और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट के लिए जाते हैं। मुंबई की एक कंपनी जो मार्च 2026 में लास वेगास में होने वाले एक एक्सपो में स्टाफ भेजना चाहती है, उसे स्थानीय कांसुलेट पर निर्भर रहने पर देरी का सामना करना पड़ेगा। इसलिए, कंपनियों के मोबिलिटी मैनेजर चेन्नई या हैदराबाद में अपॉइंटमेंट बुक कर घरेलू यात्रा खर्च उठाते हुए ‘वीजा-शॉपिंग’ कर रहे हैं।
कांसुलेट अधिकारियों के अनुसार, मुंबई में वीजा बैकलॉग का कारण महामारी के दौरान स्टाफ की कमी और क्रूज यात्रियों तथा शादी समारोह के यात्रियों की बढ़ी हुई मांग है। वे आवेदकों से अनुरोध करते हैं कि वे कैंसलेशन के लिए पोर्टल पर नजर रखें, जिससे जल्दी स्लॉट मिल सकते हैं। साथ ही, दूतावास ने शनिवार को इंटरव्यू शिफ्ट फिर से शुरू कर दी है और छोटे पोस्टों से अधिकारियों को मुंबई में तैनात कर रहा है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक असली राहत मध्य 2026 तक नहीं मिल पाएगी।
कंपनियां अब प्रोजेक्ट योजनाओं में अधिक समय शामिल कर रही हैं और महत्वपूर्ण कर्मचारियों को कम व्यस्त समय में पांच या दस साल के मल्टीपल-एंट्री वीजा लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। इमिग्रेशन वकील भी यात्रियों को याद दिलाते हैं कि अगर वे कांसुलेट बदलते हैं तो नया DS-160 फॉर्म और MRV फीस देनी होगी, और पूर्व वीजा धारकों के लिए फिंगरप्रिंट पुन: उपयोग (“ड्रॉप-बॉक्स”) विकल्प से इंतजार का समय आधा हो सकता है।
स्रोत: Times of India