
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के मई 2026 वीजा बुलेटिन में एक अनोखी चेतावनी है: भारत से EB-5 "अनरिज़र्व्ड" श्रेणी में मांग इतनी तेजी से बढ़ी है कि वित्तीय वर्ष 2026 की वीजा सीमा के भीतर रहने के लिए प्राथमिकता-तिथि कटऑफ या अस्थायी अनुपलब्धता लागू हो सकती है। आप्रवासन वकीलों का कहना है कि यह EB-5 सुधार और इंटीग्रिटी एक्ट 2022 के बाद भारत के लिए पहली औपचारिक रेट्रोग्रेशन चेतावनी है, जिसने संयुक्त स्थिति समायोजन की अनुमति देकर इस श्रेणी में रुचि को बढ़ावा दिया। सूचना स्वतंत्रता के आंकड़े दिखाते हैं कि अप्रैल 2022 से अब तक दुनिया भर में दाखिल 13,520 याचिकाओं में से 22 प्रतिशत भारतीयों की हैं, जो चीन के बाद दूसरे स्थान पर हैं। यदि कटऑफ घोषित होता है, तो भारतीय निवेशकों को I-526E निवेश याचिका के साथ-साथ I-485 ग्रीन कार्ड आवेदन एक साथ दाखिल करने का अधिकार खो जाएगा, जिससे कुल प्रक्रिया वर्षों तक लंबी हो जाएगी। विशेषज्ञ इसलिए कंपनियों और उच्च-net-worth परिवारों से आग्रह करते हैं कि वे EB-5 के तहत याचिकाएं जल्द से जल्द दाखिल करें, खासकर ग्रामीण, उच्च बेरोजगारी या इन्फ्रास्ट्रक्चर "रिज़र्व्ड" उप-श्रेणियों में, जो अभी भी वर्तमान हैं, ताकि किसी भी रेट्रोग्रेशन से पहले और निश्चित रूप से 30 सितंबर 2026 के कार्यक्रम के ग्रैंडफादरिंग डेडलाइन से पहले। जो कंपनियां EB-5 के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों को अमेरिका स्थानांतरित करती हैं, उन्हें अब वैकल्पिक गतिशीलता रणनीतियों पर विचार करना चाहिए या लंबी ब्रिजिंग वीजा अवधि के लिए बजट बनाना चाहिए।
स्रोत: Business Standard