
स्पेन और मोरक्को की अधिकारियों ने जुलाई के अंत में हुई बड़ी संख्या में सीमा पार करने की घटना की जड़ें एक वायरल टिकटॉक वीडियो में खोजी हैं, जिसमें गलत दावा किया गया था कि 31 जुलाई तक सेउटा पहुंचने वाले किसी भी व्यक्ति को स्वचालित रूप से स्पेन में निवास दिया जाएगा। एसोसिएटेड प्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस वीडियो को 48 घंटों के भीतर लाखों बार देखा गया, जिससे कैसाब्लांका जैसे दूर-दराज़ इलाकों से व्हाट्सएप पर अनौपचारिक समूह बनकर कारवां का आयोजन हुआ। जब तथ्य-जांचकर्ताओं ने इस अफवाह को खारिज किया, तब तक लगभग 72,000 लोग सेउटा की सीमा सुरक्षा को तोड़ने, तैरकर या कयाक से पार करने का प्रयास कर चुके थे। डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषकों ने बताया कि यह अभियान एक समन्वित गलत सूचना अभियान के लक्षण दिखाता है, हालांकि इसकी जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है। यह घटना बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि सोशल मीडिया की कहानियां लगभग रातोंरात वास्तविक दुनिया में गतिशीलता के झटकों में बदल सकती हैं। क्षेत्र में कार्यरत विदेशी कर्मचारियों वाले नियोक्ताओं को अचानक कर्फ्यू, बंद सीमा पारगमन और माल ढुलाई में देरी का सामना करना पड़ा। स्पेन ने तब से यूरोपीय संघ से ऑनलाइन निगरानी बढ़ाने और उन प्लेटफार्मों को दंडित करने की मांग की है जो प्रवासन से जुड़ी झूठी सूचनाओं को बिना रोक-टोक फैलाने देते हैं। कॉर्पोरेट सुरक्षा टीमों को संकट प्रबंधन योजनाओं में सोशल मीडिया भावना विश्लेषण को शामिल करना चाहिए और सीमा नीति में बदलावों की पुष्टि आधिकारिक चैनलों के माध्यम से करनी चाहिए, न कि वायरल वीडियो क्लिप्स पर भरोसा करना चाहिए।
स्रोत: AP News