
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट का एक अहम नियम, जो आव्रजन वीजा इंटरव्यू को आवेदक के देश (और यहां तक कि जिले) से जोड़ता है, 1 नवंबर 2025 से पूरी दुनिया में लागू हो गया है।
भारतीय नागरिकों के लिए यह बदलाव सामान्य है—मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई पूरी तरह से काम कर रहे हैं—लेकिन अब तीसरे देशों जैसे सिंगापुर या अबू धाबी में कम प्रतीक्षा समय वाले स्थानों पर इंटरव्यू कराने का विकल्प खत्म हो गया है। गैर-आप्रवासी वीजा इंटरव्यू पहले ही 6 सितंबर से इसी नियम के तहत आ चुके हैं।
मुख्य प्रभाव:
1. **सीमा पार बुकिंग पर रोक:** कांसुलर सिस्टम स्वचालित रूप से अपॉइंटमेंट बनाएगा तभी जब आवेदक का पासपोर्ट या निवास प्रमाण कांसुलर जिले से मेल खाता हो।
2. **अपवाद सीमित:** मानवीय या चिकित्सा कारणों से जिले के बाहर इंटरव्यू संभव है, लेकिन इसके लिए नेशनल वीजा सेंटर के माध्यम से अनुरोध करना होगा, जिससे 4-6 सप्ताह अतिरिक्त समय लग सकता है।
3. **निवास का प्रमाण:** कांसुलर अधिकारी अब निवास की पुष्टि के लिए मजबूत दस्तावेज जैसे टैक्स रिटर्न, यूटिलिटी बिल, नियोक्ता पत्र मांगेंगे।
भारतीय कंपनियों को, जो परिवार आधारित या EB श्रेणी में कर्मचारियों को अमेरिका भेज रही हैं, अपने स्थानांतरण समय-सारिणी की समीक्षा करनी चाहिए। विदेश में पढ़ रहे आश्रितों (जैसे UAE या UK में) को इंटरव्यू के लिए भारत वापस आना होगा, जब तक कि वे अपने मेजबान देश में निवासी स्थिति न प्राप्त कर लें। नियोक्ताओं को दिसंबर-जनवरी के पीक समय में बढ़े हुए यात्रा खर्च और संभावित अपॉइंटमेंट देरी के लिए भी बजट बनाना चाहिए।
स्टेट डिपार्टमेंट इस नियम को एजेंट-चालित “वीजा शॉपिंग” को रोकने के लिए एक धोखाधड़ी विरोधी कदम के रूप में देखता है। आलोचक कहते हैं कि इससे मुंबई जैसे उच्च मांग वाले केंद्रों में कतारें और लंबी हो जाएंगी, जहां पहले से ही 200 दिन की औसत प्रतीक्षा है। उद्योग संघ छह महीने से अधिक बैकलॉग होने पर सीमित क्रॉस-पोस्ट लोड-बैलेंसिंग के लिए भारत-विशिष्ट पायलट की मांग कर रहे हैं।
भारतीय नागरिकों के लिए यह बदलाव सामान्य है—मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई पूरी तरह से काम कर रहे हैं—लेकिन अब तीसरे देशों जैसे सिंगापुर या अबू धाबी में कम प्रतीक्षा समय वाले स्थानों पर इंटरव्यू कराने का विकल्प खत्म हो गया है। गैर-आप्रवासी वीजा इंटरव्यू पहले ही 6 सितंबर से इसी नियम के तहत आ चुके हैं।
मुख्य प्रभाव:
1. **सीमा पार बुकिंग पर रोक:** कांसुलर सिस्टम स्वचालित रूप से अपॉइंटमेंट बनाएगा तभी जब आवेदक का पासपोर्ट या निवास प्रमाण कांसुलर जिले से मेल खाता हो।
2. **अपवाद सीमित:** मानवीय या चिकित्सा कारणों से जिले के बाहर इंटरव्यू संभव है, लेकिन इसके लिए नेशनल वीजा सेंटर के माध्यम से अनुरोध करना होगा, जिससे 4-6 सप्ताह अतिरिक्त समय लग सकता है।
3. **निवास का प्रमाण:** कांसुलर अधिकारी अब निवास की पुष्टि के लिए मजबूत दस्तावेज जैसे टैक्स रिटर्न, यूटिलिटी बिल, नियोक्ता पत्र मांगेंगे।
भारतीय कंपनियों को, जो परिवार आधारित या EB श्रेणी में कर्मचारियों को अमेरिका भेज रही हैं, अपने स्थानांतरण समय-सारिणी की समीक्षा करनी चाहिए। विदेश में पढ़ रहे आश्रितों (जैसे UAE या UK में) को इंटरव्यू के लिए भारत वापस आना होगा, जब तक कि वे अपने मेजबान देश में निवासी स्थिति न प्राप्त कर लें। नियोक्ताओं को दिसंबर-जनवरी के पीक समय में बढ़े हुए यात्रा खर्च और संभावित अपॉइंटमेंट देरी के लिए भी बजट बनाना चाहिए।
स्टेट डिपार्टमेंट इस नियम को एजेंट-चालित “वीजा शॉपिंग” को रोकने के लिए एक धोखाधड़ी विरोधी कदम के रूप में देखता है। आलोचक कहते हैं कि इससे मुंबई जैसे उच्च मांग वाले केंद्रों में कतारें और लंबी हो जाएंगी, जहां पहले से ही 200 दिन की औसत प्रतीक्षा है। उद्योग संघ छह महीने से अधिक बैकलॉग होने पर सीमित क्रॉस-पोस्ट लोड-बैलेंसिंग के लिए भारत-विशिष्ट पायलट की मांग कर रहे हैं।
स्रोत: VisaVerge