
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने छह महीने का पायलट प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें बिजनेस (B-1) और टूरिस्ट (B-2) वीजा आवेदक अतिरिक्त 750 अमेरिकी डॉलर देकर जल्दी इंटरव्यू डेट खरीद सकते हैं। यह नॉन-इमिग्रेंट वीजा एक्सपेडाइटेड अपॉइंटमेंट पायलट प्रोग्राम 1 जुलाई से शुरू होकर 31 दिसंबर 2026 तक चलेगा और फिलहाल मेक्सिको में अमेरिकी कांसुलर पोस्टों को कवर करता है, जबकि अन्य स्थानों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। भारत में पांच अमेरिकी मिशनों में 150 से 500 दिनों तक वेटिंग होती है, इसलिए अगर नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद या कोलकाता इस योजना में शामिल होते हैं तो भारतीय आवेदकों को फायदा हो सकता है, हालांकि स्टेट डिपार्टमेंट ने विस्तार की पुष्टि नहीं की है। इस विकल्प का उपयोग करने के लिए आवेदक को पहले 185 अमेरिकी डॉलर का सामान्य MRV शुल्क देना होगा, एक सामान्य स्लॉट बुक करना होगा और फिर यदि पात्र हो तो “पेड एक्सपेडाइट” चुनकर 10 दिन के अंदर अपॉइंटमेंट देख सकते हैं। ध्यान देने वाली बात है कि अतिरिक्त शुल्क केवल इंटरव्यू डेट को जल्दी कराने के लिए है; यह इंटरव्यू के बाद की प्रक्रिया को तेज नहीं करता और न ही मंजूरी की गारंटी देता है। यदि आवेदक इंटरव्यू में नहीं आता या रद्द करता है तो शुल्क वापस नहीं मिलेगा। इमिग्रेशन सलाहकार कंपनियों को सलाह देते हैं कि वे लागत और तात्कालिकता के बीच संतुलन बनाएं और मजबूत निमंत्रण पत्र व दस्तावेज़ तैयार रखें क्योंकि सुरक्षा जांच में कोई बदलाव नहीं होगा। मोबिलिटी मैनेजर्स के लिए यह पायलट अंतिम समय में C-स्तरीय यात्रा, डील क्लोजिंग और आपातकालीन सपोर्ट विजिट के लिए एक अस्थायी समाधान है, लेकिन यह लंबी अवधि की वीजा योजना का विकल्प नहीं होना चाहिए। HR टीमों को यात्रा नीतियों को अपडेट कर 750 अमेरिकी डॉलर के शुल्क की प्रतिपूर्ति नियम स्पष्ट करने चाहिए और यात्रियों को इसकी सीमाओं के बारे में जागरूक करना चाहिए—विशेषकर यह कि प्रशासनिक प्रक्रिया अभी भी प्रवेश में देरी कर सकती है। कंपनियों को भारत में संभावित विस्तार पर नजर रखनी चाहिए और वित्तीय वर्ष 2026-27 के यात्रा बजट में इसे शामिल करना चाहिए।
स्रोत: Business Today