
भारत के 5 मिलियन से अधिक प्रवासी समुदाय के लिए एक स्वागतयोग्य कदम के रूप में, गृह मंत्री अमित शाह ने 30 जून को इलेक्ट्रॉनिक ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (e-OCI) कार्ड का अनावरण किया। इस पहल के तहत OCI प्रक्रिया—आवेदन, दस्तावेज़ अपलोड से लेकर मंजूरी और कार्ड जारी करने तक—सभी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ गई है, जिससे वाणिज्य दूतावासों के दौरे और 20 वर्ष की आयु के बाद पासपोर्ट नवीनीकरण पर बुकलेट पुनः जारी करने की जरूरत खत्म हो गई है। नए सिस्टम के तहत आवेदकों को एक अनूठा स्थायी पंजीकरण नंबर मिलेगा और वे अपने स्मार्टफोन पर सुरक्षित QR-कोडेड कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे। भारतीय हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन काउंटरों को हैंडहेल्ड स्कैनर से लैस किया जा रहा है जो सरकार के इमिग्रेशन, वीज़ा और विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग (IVFRT) डेटाबेस से जुड़ा होगा, जिससे अधिकारी 10 सेकंड से भी कम समय में OCI स्थिति की पुष्टि कर सकेंगे। यह सुधार लंबी प्रतीक्षा अवधि की शिकायतों के बाद आया है, जो अक्सर आठ महीने से अधिक होती थी, और उन यात्रियों के मामलों के कारण जो पासपोर्ट नंबर मेल न खाने पर यात्रा से वंचित हो जाते थे। डिजिटल कार्ड धोखाधड़ी के जोखिम को भी कम करते हैं: छेड़छाड़-रोधी मेटाडेटा से पहचान विवरण को क्लोन या बदलना मुश्किल हो जाता है। नियोक्ताओं को भी लाभ होगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पुष्टि की है कि e-OCI धारक आगामी फास्ट-ट्रैक इमिग्रेशन ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम (FTI-TTP) का उपयोग कर सकेंगे, जिससे लौटने वाले अधिकारी यूएस ग्लोबल एंट्री की तरह एक समर्पित ई-गेट चैनल का लाभ उठा सकेंगे। मौजूदा बुकलेट धारक 1 जुलाई से ociservices.gov.in पर लॉग इन कर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के e-OCI में परिवर्तित हो सकते हैं। गृह मंत्रालय मार्च 2027 तक पूरी तरह संक्रमण की उम्मीद करता है, जिसके बाद बुकलेट को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा।
स्रोत: The Financial Express