
18 जुलाई को विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग में प्रवक्ता जैसवाल खन्ना ने पुष्टि की कि भारत और अमेरिका के बीच वीजा आवेदनकर्ताओं को लंबी प्रतीक्षा अवधि से निपटने के लिए ‘सक्रिय संवाद’ जारी है। यह बयान शिक्षा एजेंटों और कॉर्पोरेट मोबिलिटी मैनेजर्स की बढ़ती शिकायतों के बाद आया है, जिन्होंने बताया कि कई अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में पहली बार F-1 छात्र वीजा के लिए अपॉइंटमेंट्स शरदकालीन सेमेस्टर की शुरुआत के बाद हो रहे हैं। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वीजा नीति एक संप्रभु मामला है, लेकिन बैकलॉग कम करना दोनों देशों के आर्थिक हित में है। पिछले वर्ष 2,50,000 से अधिक भारतीय छात्र अमेरिकी संस्थानों में नामांकित थे, और भारतीय नागरिक H-1B विशेष पेशे वीजा याचिकाओं का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा थे। देरी से ट्यूशन राजस्व, अनुसंधान समयसीमा और कॉर्पोरेट परियोजना स्टाफिंग पर असर पड़ता है। अमेरिकी दूतावास के सूत्रों के अनुसार, इस महीने के अंत तक छात्र वीजा के लिए 15,000 अतिरिक्त इंटरव्यू स्लॉट खोले जाएंगे और बार-बार B-1/B-2 यात्रियों के लिए इंटरव्यू-मुक्त अपॉइंटमेंट्स बढ़ाए जाएंगे। हालांकि, कांसुलर स्टाफिंग अभी भी महामारी पूर्व स्तर से कम है। यूएस-भारत मोबिलिटी पाइपलाइनों वाली वैश्विक कंपनियों को असाइनमेंट योजना में अतिरिक्त समय जोड़ने और ग्रेजुएट हायरिंग के लिए कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया को अस्थायी विकल्प के रूप में विचार करने की सलाह दी गई है। शिक्षा प्रदाताओं को भी भारतीय छात्रों को I-20 फॉर्म जल्दी जारी करने और लचीले आगमन समय देने के लिए कहा गया है। यह संवाद अगस्त में वाशिंगटन में होने वाली भारत-अमेरिका कांसुलर वर्किंग ग्रुप बैठक में जारी रहेगा, जहां दोनों पक्ष प्रगति की समीक्षा करेंगे और रिमोट इंटरव्यू तथा एआई आधारित दस्तावेज़ छंटनी जैसे पायलट प्रोजेक्ट्स पर चर्चा करेंगे।
स्रोत: The Times of India