
29 अप्रैल 2026 को EY इंडिया और भारतीय उद्योग परिसंघ (FICCI) द्वारा जारी एक संयुक्त श्वेतपत्र में चेतावनी दी गई है कि भारत विश्व के अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन का केवल 1.5% हिस्सा ही आकर्षित करता है, जो इसकी सांस्कृतिक महत्ता के मुकाबले बहुत कम है। मुख्य बाधाएं हैं: समय लेने वाले वीज़ा, असंगत हवाई कनेक्टिविटी और उच्च श्रेणी के होटल कमरों पर 18% वस्तु एवं सेवा कर (GST) के कारण महंगे खर्च। 104 पृष्ठों के इस अध्ययन को जयपुर के ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाज़ार में लॉन्च किया गया, जिसमें प्रीमियम आवास के लिए GST को 9% तक घटाने और वर्तमान ई-वीजा व्यवस्था को 180 से बढ़ाकर 240 राष्ट्रीयताओं तक विस्तारित करने का प्रस्ताव है। यह एक शेंगेन-शैली का ‘इंडिया वन’ मल्टी-स्टेट परमिट भी सुझाता है, जिससे विदेशी पर्यटक एक ही यात्रा कार्यक्रम दर्ज कर सकेंगे, बजाय अलग-अलग राज्य नियमों के जंजाल में फंसने के। कॉर्पोरेट यात्रा क्षेत्र के लिए रिपोर्ट में 48 घंटे में प्रोसेस होने वाला ‘MICE कॉरिडोर’ फास्ट-ट्रैक वीज़ा सुझाया गया है, जो 90 दिनों की अवधि में कई बार प्रवेश के लिए वैध होगा, और वैश्विक सम्मेलनों व प्रदर्शनों के लिए होगा। FICCI का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटक हिस्से में हर एक प्रतिशत की वृद्धि GDP में ₹500 अरब जोड़ सकती है और 20 लाख नौकरियां पैदा कर सकती है। पर्यटन मंत्रालय ने रिपोर्ट प्राप्ति की पुष्टि की है और संकेत दिया है कि GST में सुधार पर चर्चा जुलाई में होने वाली अगली GST परिषद बैठक में हो सकती है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह श्वेतपत्र उन सुधारों के लिए ठोस आधार प्रदान करता है जिनका लंबे समय से ट्रैवल-टेक स्टार्टअप्स और वैश्विक होटल श्रृंखलाएं समर्थन कर रही हैं।
स्रोत: The Morning Voice