
यूरोप का लंबे समय से प्रतीक्षित एंट्री/एग्जिट सिस्टम (EES) 10 अप्रैल से पूरी तरह लागू हो जाएगा, जो पासपोर्ट स्टैम्प की जगह 29 शेंगेन देशों में लाइव बायोमेट्रिक रजिस्टर से बदल जाएगा। *यूरोन्यूज* की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च से सभी तृतीय देश के नागरिक—including शेंगेन वीजा वाले भारतीय नागरिक—का प्री-रजिस्ट्रेशन हो चुका है, लेकिन **मैनुअल छूट अगले सप्ताह समाप्त हो जाएगी**।
कैसे काम करता है: 10 अप्रैल के बाद पहली एंट्री पर फिंगरप्रिंट और चेहरे की पहचान सेल्फ-सर्विस कियोस्क या स्टाफ डेस्क पर करनी होगी; बाद की एंट्रीज के लिए फास्ट ई-गेट्स का उपयोग होगा। सिस्टम अपने आप 90/180 दिन की सीमा गिनता है और ओवरस्टे को रियल टाइम में चिन्हित करता है।
शुरुआती दिक्कतें: एयरपोर्ट और एयरलाइन समूहों ने चेतावनी दी है कि जब तक फ्रीक्वेंट विजिटर डेटाबेस भरता है, तब तक कतारें दो घंटे से अधिक हो सकती हैं। जिन यात्रियों ने वीजा अवधि के बीच पासपोर्ट रिन्यू कराया है, उन्हें दोनों दस्तावेज साथ लेकर चलना होगा जब तक नया पासपोर्ट सिस्टम में दर्ज न हो जाए।
भारतीय कॉर्पोरेट प्रभाव:
• दिन गिनती की सटीकता अब किसी भी “ग्रेस पीरियड” को खत्म कर देती है, जिसे पहले आखिरी मिनट के बिजनेस ट्रिप्स में इस्तेमाल किया जाता था—मोबिलिटी टीमों को यात्रा इतिहास की जांच करनी चाहिए।
• जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड्स में बड़ी असाइनमेंट आबादी को लैंड बॉर्डर पर बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन में देरी का सामना करना पड़ सकता है; कंपनियों को अप्रैल-मई के दौरान यात्राओं को stagger करना चाहिए।
डिजिटल तैयारी: यूरोपीय संघ का *ट्रैवल टू यूरोप* मोबाइल ऐप आगमन से 72 घंटे पहले सेल्फी और पासपोर्ट फोटो अपलोड करने की सुविधा देता है; स्किपहोल और फ्रैंकफर्ट में पायलट प्रोजेक्ट्स में इसका उपयोग करने पर कियोस्क समय में 40 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
आगे की राह: EES, ETIAS के लिए प्रवेश द्वार है, जो 2026 के अंत में लागू होने वाला पेड ट्रैवल ऑथराइजेशन है, जिसका मतलब है कि भारतीय शॉर्ट-स्टे यात्री इस साल के भीतर एक और अनुपालन स्तर का सामना करेंगे।
कैसे काम करता है: 10 अप्रैल के बाद पहली एंट्री पर फिंगरप्रिंट और चेहरे की पहचान सेल्फ-सर्विस कियोस्क या स्टाफ डेस्क पर करनी होगी; बाद की एंट्रीज के लिए फास्ट ई-गेट्स का उपयोग होगा। सिस्टम अपने आप 90/180 दिन की सीमा गिनता है और ओवरस्टे को रियल टाइम में चिन्हित करता है।
शुरुआती दिक्कतें: एयरपोर्ट और एयरलाइन समूहों ने चेतावनी दी है कि जब तक फ्रीक्वेंट विजिटर डेटाबेस भरता है, तब तक कतारें दो घंटे से अधिक हो सकती हैं। जिन यात्रियों ने वीजा अवधि के बीच पासपोर्ट रिन्यू कराया है, उन्हें दोनों दस्तावेज साथ लेकर चलना होगा जब तक नया पासपोर्ट सिस्टम में दर्ज न हो जाए।
भारतीय कॉर्पोरेट प्रभाव:
• दिन गिनती की सटीकता अब किसी भी “ग्रेस पीरियड” को खत्म कर देती है, जिसे पहले आखिरी मिनट के बिजनेस ट्रिप्स में इस्तेमाल किया जाता था—मोबिलिटी टीमों को यात्रा इतिहास की जांच करनी चाहिए।
• जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड्स में बड़ी असाइनमेंट आबादी को लैंड बॉर्डर पर बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन में देरी का सामना करना पड़ सकता है; कंपनियों को अप्रैल-मई के दौरान यात्राओं को stagger करना चाहिए।
डिजिटल तैयारी: यूरोपीय संघ का *ट्रैवल टू यूरोप* मोबाइल ऐप आगमन से 72 घंटे पहले सेल्फी और पासपोर्ट फोटो अपलोड करने की सुविधा देता है; स्किपहोल और फ्रैंकफर्ट में पायलट प्रोजेक्ट्स में इसका उपयोग करने पर कियोस्क समय में 40 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
आगे की राह: EES, ETIAS के लिए प्रवेश द्वार है, जो 2026 के अंत में लागू होने वाला पेड ट्रैवल ऑथराइजेशन है, जिसका मतलब है कि भारतीय शॉर्ट-स्टे यात्री इस साल के भीतर एक और अनुपालन स्तर का सामना करेंगे।
स्रोत: Euronews