
इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा संकलित विशेष डेटा से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2027 के H-1B कैप सीजन के लिए भारत से दर्ज की गई रजिस्ट्रेशन में 38.5% की गिरावट आई है, जो पिछले सात वर्षों में सबसे तेज साल-दर-साल कमी है। भारत से केवल 1,06,000 अनूठी रजिस्ट्रेशन हुईं, जो पिछले वर्ष के 1,72,000 से कम हैं। इमिग्रेशन वकील इस गिरावट के तीन मुख्य कारण बताते हैं। पहला, 16 अक्टूबर से यूएस CIS फाइलिंग फीस बढ़ाएगा—फॉर्म I-129 (H-1B) की फीस 460 डॉलर से बढ़कर 780 डॉलर हो जाएगी—जिससे कई मध्यम आकार की आईटी कंपनियों ने स्पॉन्सरशिप की संख्या कम कर दी। दूसरा, यह पहली बार था जब वेतन आधारित चयन प्राथमिकता लागू हुई, जो उच्च वेतन वाले पदों को प्राथमिकता देती है, जो पारंपरिक ऑफशोर आउटसोर्सिंग मॉडल से बाहर होते हैं। तीसरा, मंदी के डर के कारण अमेरिका में क्लाइंट्स ने गैर-जरूरी टेक प्रोजेक्ट्स को टाल दिया है, जिससे ऑनसाइट स्टाफिंग की मांग कम हुई है। जबकि गहरे संसाधनों वाली वैश्विक आईटी कंपनियों (TCS, Infosys, Wipro) ने रजिस्ट्रेशन बनाए रखे, टियर-2 विक्रेताओं ने आधे से अधिक रजिस्ट्रेशन कम कर दिए। स्टार्ट-अप्स, खासकर ई-कॉमर्स और फिनटेक क्षेत्र के, लगभग गायब हो गए हैं। इसका प्रभाव यह होगा कि अक्टूबर 2027 से शुरू होने वाले अमेरिकी प्रोजेक्ट्स के लिए प्रतिभा की आपूर्ति और भी सख्त हो जाएगी। कंपनियों को कनाडा और मेक्सिको में नजदीकी हायरिंग तेज करनी चाहिए या भारत में रिमोट डिलीवरी सेंटर बढ़ाने चाहिए। एचआर को L-1B (विशेषज्ञता ज्ञान) और हाल ही में उदार किए गए B-1 इन-लीयू-ऑफ-H-1B पायलट जैसे वैकल्पिक अमेरिकी वीजा वर्गों का भी विश्लेषण करना चाहिए। इस गिरावट से USCIS को प्रोसेसिंग में राहत मिल सकती है, लेकिन यह भारतीय कंपनियों की ज्ञान-स्थानांतरण योजनाओं को धीमा कर सकता है, खासकर अगले साल आने वाले AI और क्वांटम-कंप्यूटिंग कॉन्ट्रैक्ट्स के मद्देनजर।