
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने 6 मार्च की देर रात पुष्टि की कि ईरान-इज़राइल के बीच तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में व्यापक हवाई क्षेत्र बंद होने के चलते भारतीय एयरलाइनों ने उस दिन के लिए निर्धारित 278 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दीं। ये रद्दीकरण दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोच्चि से दुबई, दोहा और जेद्दा जैसे हब्स के लिए निर्धारित उड़ानों को प्रभावित करते हैं। एयरलाइंस अब रेड सी कॉरिडोर के रास्ते या मिस्र के ऊपर से उड़ान भर रही हैं, जिससे उड़ान का समय तीन घंटे तक बढ़ गया है और ईंधन लागत भी बढ़ी है। ट्रैवल मैनेजमेंट कंपनियों के अनुसार, यूरोप के लिए बिजनेस क्लास की स्पॉट टिकटों के दाम 48 घंटे में 25 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जबकि समय-संवेदनशील कार्गो—जैसे दवाइयां—मस्कट के जरिए समुद्र-हवा विकल्पों पर शिफ्ट किया गया है। बीमा कंपनियों ने मध्य पूर्व के ऊपर से उड़ानों को युद्ध जोखिम प्रीमियम की श्रेणी में डाल दिया है। कुछ कॉर्पोरेट्स ने फोर्स मेजर क्लॉज का सहारा लेकर ऑन-साइट प्रोजेक्ट की शुरुआत में देरी की है, जो दर्शाता है कि भू-राजनीतिक तनाव अब सीधे भारत की व्यावसायिक गतिशीलता को प्रभावित कर रहे हैं। एयर ट्रैफिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत-खाड़ी मार्ग सामान्यतः देश के 30 प्रतिशत आउटबाउंड बिजनेस ट्रैफिक को संभालते हैं; लंबे समय तक प्रतिबंधों से तिमाही GDP में 0.3 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, क्योंकि यह भौतिक यात्रा से जुड़ी वस्तु व्यापार और सेवा निर्यात को प्रभावित करेगा।