
भारत के नागरिक उड्डयन नियामकों ने एयर इंडिया की कड़ी आलोचना की है, क्योंकि तीन इतालवी नागरिक दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल से बिना इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी किए लुफ्थांसा की म्यूनिख उड़ान में सवार हो गए। मलयालम दैनिक *मनोरमा ऑनलाइन* के अनुसार, ये यात्री 3 सितंबर को अमृतसर से एयर इंडिया के ‘हब-एंड-स्पोक’ कनेक्शन के जरिए दिल्ली पहुंचे थे। उनके घरेलू बोर्डिंग पास को गलती से Easy-Connect अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज माना गया, जिससे वे सीधे गेट 39 तक पहुंच गए और 4 सितंबर की सुबह की उड़ान में सवार हो गए। यह चूक केवल यात्री सूची की मैनुअल जांच के दौरान सामने आई, जिसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने 12 सितंबर को टाटा के स्वामित्व वाली एयरलाइन को नोटिस जारी किया और सात दिनों में स्पष्टीकरण मांगा। गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक में एयर इंडिया, इमिग्रेशन ब्यूरो और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना ग्राउंड स्टाफ के प्रशिक्षण में कमी और भारत के घरेलू से अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर मॉडल की कमजोरियों को उजागर करती है। कंपनियां जो वन-स्टॉप कनेक्शन पर निर्भर हैं, उन्हें अब कड़े दस्तावेज जांच, लंबी न्यूनतम कनेक्शन समय और सेकेंडरी एयरपोर्ट्स पर Easy-Connect सुविधा के निलंबन का सामना करना पड़ सकता है। मोबिलिटी मैनेजर्स के लिए तत्काल सलाह है कि दिल्ली से गुजरने वाले कर्मचारियों को इमिग्रेशन स्टैम्प की पुनः जांच करने को कहें, भले ही उनके बोर्डिंग पास में थ्रू-चेक दिख रहा हो, जब तक नई एसओपी लागू नहीं हो जाती।
स्रोत: Manorama Online