
सोमवार को जारी एक विश्लेषण में JM फाइनेंशियल ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा आठ प्रमुख टेक कंपनियों—जिनमें माइक्रोसॉफ्ट, इंफोसिस और टीसीएस शामिल हैं—की स्थायी श्रम प्रमाणपत्र (PERM) आवेदन प्रक्रिया को अचानक निलंबित करने से संचालन लागत बढ़ने और अमेरिका में स्थानीय भर्ती बढ़ने की संभावना है। द ट्रिब्यून के बिजनेस डेस्क द्वारा रिपोर्ट किए गए इस नोट में कहा गया है कि अमेरिकी कर्मचारियों के लिए उच्च वेतन मानदंडों के कारण ऑन-शोर परियोजना बजट में 8-12 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। ट्रंप प्रशासन द्वारा 8 अक्टूबर को घोषित PERM निलंबन के तहत प्रभावित कंपनियां नए ग्रीन कार्ड प्रायोजन के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगी जब तक कि वे पिछले मामलों के व्यापक ऑडिट में सफल न हों। मौजूदा H-1B वीजा धारक काम जारी रख सकते हैं, लेकिन छह साल की सीमा के करीब कर्मचारी, जिनके PERM आवेदन अटके हैं, उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है। JM फाइनेंशियल का अनुमान है कि इस स्थिति में लगभग 25,000 कर्मचारी हो सकते हैं। भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियों ने मेक्सिको और कनाडा में नजदीकी डिलीवरी केंद्रों पर भर्ती बढ़ा दी है, लेकिन ग्राहक—ज्यादातर फॉर्च्यून 1000 कंपनियां—अभी भी अमेरिकी समय क्षेत्र के अनुसार काम करना पसंद करती हैं। कुछ अनुबंधों में ‘‘वीजा-जोखिम’’ क्लॉज शामिल किए गए हैं, जो स्टाफिंग में कमी होने पर काम स्थानांतरित करने की अनुमति देते हैं। कॉर्पोरेट मोबिलिटी और ग्लोबल टैलेंट टीमों के लिए संदेश स्पष्ट है: क्लाउड-सिक्योरिटी आर्किटेक्ट्स से लेकर SAP S/4HANA फंक्शनल लीड्स तक, पहले से ही कम उपलब्ध विशिष्ट कौशलों के लिए प्रतिस्पर्धा तेज होगी। HR नेताओं को भी असाइनमेंट की अवधि पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि वर्तमान माहौल में लंबी अवधि के H-1B से ग्रीन कार्ड मार्ग की तुलना में छोटे प्रोजेक्ट-आधारित L-1B रोटेशन अधिक व्यावहारिक हो सकता है। श्रम विभाग ने ऑडिट पूरा करने के लिए कोई समय सीमा नहीं दी है, जिससे निवेशक और कर्मचारी दोनों अनिश्चितता में हैं। विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि यदि यह अनिश्चितता लंबी चली तो तकनीकी प्रतिभा का पलायन यूरोप और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की ओर तेज हो सकता है।
स्रोत: The Tribune (India)